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स्वामी विवेकानन्द जयन्ती पर

मैं आज स्वामी विवेकानन्द का स्मरण करूँगा । ’हिन्दुस्तान ’ अखबार द्वारा दिए गये २०१० के पंचाग के अनुसार ६ जनवरी , काशी से प्रकाशित ठाकुर प्रसाद के प्रसिद्ध पंचाग के हिसाब से ७ जनवरी तथा रोमां रोलां द्वारा लिखी गयी स्वामीजी की जीवनी के अनुसार १२ जनवरी को
 
अफ़लातून
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व्यथा के भार से थका नागरिक /(रघुवीर सहाय पर मनमोहन) दूसरी किस्त

पिछली किस्त से जारी) इसी तरह यह बात भी गौरतलब है कि उन्होंने अपने समय के इस शीतयुद्धीय सुझाव को अमान्य कर दिया था कि `जनतांत्रिक मूल्यों` या `मानव-मूल्यों`, व्यक्ति और `अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता` को अपनी जाहिल और निजी निर्विघ्न दुनिया की ढाल बनाकर खड़
 
Ek ziddi dhun
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रघुवीर सहाय की एक कविता

( रघुवीर सहाय उन कवियों में से हैं जिन्होंने हिन्दी कविता को भाषा , शिल्प और कहन तीनो स्तर पर एक नया मुहावरा दिया । वह हमारी ही नहीं पूर्ववर्ती पीढी के भी काव्य गुरु रहे हैं। यहाँ उनकी दो कवितायें उनके कविता संग्रह '' हंसो हंसो जल्दी हंसो ''से )वह कौन था
 
अशोक कुमार पाण्डेय