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यादों से होली

होली...........रंगों से भरा त्यौहार.....जिसमे किसी भी तबके में कोई अंतर नहीं होता.........हर एक बस रंगों से सराबोर होता है....लेकिन कोई-कोई अपने दोस्तों से दूर होकर केवल दूसरों को रंगों से खेलते हुए और खुशियाँ मानते हुए देखता है,कभी खुश होता है...तो कभी
 
Neha
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रंग – कविता – रवि कुमार

रंग (a poem by ravi kumar, rawatabhata) रंग बहुत महत्वपूर्ण होते हैं इसलिए भी कि हम उनमें ज़्यादा फ़र्क कर पाते हैं कहते हैं पशुओं को रंग महसूस नहीं हो पाते गोया रंगों से सरोबार होना शायद ज़्यादा आदमी होना है यह समझ गहरे से पैबस्त है दिमाग़ों में तभी तो यह
 
रवि कुमार, रावतभाटा
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कलाकार से मुहब्बत

कई बार महसूस हुआ कि मुहब्बत की घटना घटेगी ,इस मुहब्बत में स्वर्ग के सुख की कल्पना होगी ,इस सुख में एक दोजख जैसा दर्द भी होगा -जिसमें से मुझे उमर भर गुजरना होगा -मैं अपने जिस्म के होंठो से तुम्हारे जिस्म को एक ही साँस में पीना चाहती थी ,नर्क में जल रहे
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कुरता फाड़ होली :)

होली आती है तो अपने साथ ढेरों पुरानी यादें भी ले आती है । वो क्या है जैसे-जैसे बड़े होते जाते है होली खेलने का वो जोश और उत्साह ख़त्म तो नही होता है पर कुछ कम जरुर होने लग जाता है । क्योंकि अगर हम होली जम कर खेलना भी चाहें तो खेलें किसके साथ । खैर हो
 
mamta
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