उफ् बुढ़ापा हाय जवानी.........
तुम्हें नजर नहीं आता, इस सीट के ऊपर क्या लिखा है!!-इस तीखी आवाज को सुनकर मेट्रो ट्रेन में अचानक सन्नाटा छा गया। सभी का ध्यान उस बूढे की तरफ गया जो उस गरीब-से नौजवान को दहकती ऑंखों से घूर रहा था। उसके बगल में एक बूढ़ा सरदार बैठा था-हुण् माफ कर दो,
May 04 2010 10:23 PM



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