इतना भी न इतराओ ....
इतना भी न इतराओ...कई नदियों को हमने बहते देखा हैखेत खलिहानों को मिटते देखा हैकई साहिल को बनते-बिगड़ते देखा हैमेरे दोस्त यह ठीक है किनदियां जब चलती है अल्हड़ होती हैकई मोड़ पर इठलाती बल खाती हैंसफर में इसके नये निशां बनते हैंदोस्त हमने
May 08 2010 04:18 AM



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