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जे काम का तुम्हारो बाप करैगो ?

मुश्किल जी है कि अब हर आदमी अपनी अपनी जिम्मेदारियन से बचवें चाहतै. लोग-बाग जी चाहन लगे हैं कि बैठे -बिठाये सबई कछू मिल जाय, काम -काज धेला भर कौ नायं करवें परै. कोई कोई तो ऐसेऊ आलसी दिखाई परत हैं कि बैठे बैठे इंतज़ार कर रये हैं कि कोऊ आवे और कौर म्हों में
 
अरविन्द चतुर्वेदी Arvind Chaturvedi
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