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सवाल ज़मीन का

सोचो, करो कुछ भी..जमीन हमारी ही है!!अशोक मालवीयसरकार हो या पूंजीवादी ताकतें, इन्होंने कभी भी आदिवासियों को उनका हक नहीं देना चाह है? लेकिन जब जनाक्रोश एक सैलाब का रूप धारण कर लेता तो इसकी दहशत की वजह से इनके हक को दर्शाने वाले कानून तो बना दिये जाते है।
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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भविष्यफल और वैज्ञानिकता

(युवा दख़ल पत्रिका पिछले दो सालों से ग्वालियर युवा संवाद द्वारा निकाली जा रही है। इस बार इसमें कुल पन्ने हैं १६ और मूल्य ५ रु… कवर पेज़ बनाया भाई रवि कुमार रावतभाटा ने। मंगाने के लिये मुझे मेल करें या फोन... यहाँ इसी अंक से विष्णु नागर जी का एक
 
अशोक कुमार पाण्डेय
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आपका घर गच्ची वाला है

( देवास के हमारे साथी सौरभ का यह लेख युवा दख़ल के ताज़ा अंक में प्रकाशित है। होली की मस्तियों के बीच उम्मीद करता हूं आप इन्हें भी नहीं भुलेंगे!)पूरे के चावल दे दो देवास की एक बस्ती में करीब 34 लड़कियां हैं जो नियमित रूप से हमारे पास पढ़ने आती हैं। इन
 
अशोक कुमार पाण्डेय