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संजय व्यास की कविता - चौथी किस्त

बस की लय को पकड़ते हुएये बस दो रेगिस्तानी जिला मुख्यालयों को जोडती हैजो दिन में शहर और रात में गाँव हो जाते हैसुबह ये शहर का सपना लिए जगते हैं और रात को सन्नाटा लिए सो जातें हैंइनके बीच सदियों का मौन हैं, सिर्फ कहीं कहीं जीवन तो कहीं इतिहास मुखर हैं।बस की
 
शिरीष कुमार मौर्य
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संजय व्यास की कविता - तीसरी किस्त

फ्रेम एक भरी पूरी उम्र लेकरदुनिया से विदा हुई दादी के बारे मेंसोचता है उसका पोताबड़े से फ्रेम में उसके चित्र को देखता।विस्तार में फ्रेम को घेरे उसका चेहराबेशुमार झुर्रियां लिएजिनमे तह करके रखा है उसने अपना समय।समय जो साक्षी रहा हैकई चीज़ों के अन्तिम बार
 
शिरीष कुमार मौर्य
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संजय व्यास की कविता - दूसरी किस्त

घर गृहस्थी में धंसता पुराना प्रेम पत्र (एक काव्यकथा) " श्री गोपीवल्लभ विजयते"बम्बोई(तिथि अस्पष्ट)प्यारी सुगना,मधुर याद.श्री कृष्ण कृपा से मैं यहाँ ठीक हूँ और तुम भी घर पर प्रभु कृपा से सानंद होंगी.मेरा मन तो बहुत कर रहा है कि पत्र के स्थान पर स्वयं
 
शिरीष कुमार मौर्य
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अशोक कुमार पाण्डेय की एक कविता

एक पुरस्कार समारोह से लौटकरवह सीकरी का दरबार ही था भरा-पूराऔर वहां संत ही थे सारेयह ग़र्मियों की एक ख़ुशनुमा शाम थीजब शहर के सारे पेड़ मुरझा चुके थेउस लान की घास रंगों से भी ज़्यादा गहरी हरी थीऔर इतनी ताज़ी कि शायद ओस भी शर्माती होगी उन पर गिरने से
 
शिरीष कुमार मौर्य
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संजय व्यास की कविता - एक

मैं अनुनाद के लिए जिन कवियों की कविता हासिल करना चाहता रहा हूँ...संजय उनमें से एक हैं। इस बार काफ़ी संकोच के बाद अंततः उन्होंने मेरे अनुरोध का मान रखा है। संजय व्यास जोधपुर में रहते हैं और मैं नहीं जानता कि उनकी कविता उनके ब्लॉग के अलावा भी कहीं छपी है।
 
शिरीष कुमार मौर्य
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अशोक कुमार पांडे की कविताएँ

पिछले दो सालों में अशोक कुमार पांडे की कविता ने मुझे लगातार आकर्षित किया है। उनके पास मुझे ख़ास तरह की इच्छाशक्ति दिखाई दी है, जिसे मैं हर हाल में राजनीतिक कहना चाहूंगा। उस पर कोई आवरण नहीं चढ़ाया जा सकता है, वो अपने भीतर के तेज से चमकती है। उनकी कविता
 
शिरीष कुमार मौर्य