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............नीयत .............................................................

ट्रेन में सफ़र करते समय मिले थे वे तीनों  --------------१७ -१८ वर्ष का लड़का, अच्छा भला लग रहा था, हट्टा-कट्टा, पैर में एक घाव  खरोंच जैसा बनाया हुआ लग रहा था जिस पर से हल्का खून रिस रहा था, चेहरे पर मुस्कान कुटिलता की कहानी सी कह रही थी
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-चित्रों भरी कहानी---गुप्तगंगा दर्शन

नासिक यात्रा---मई ०९----- चित्रों भरी कहानी---गुप्तगंगा दर्शन एक--- रानू , मैं , और निशी ----- गुप्तगंगा जाते हुए ---- त्र्यंब्केश्वर में ---- चल चला चल !!! दो --- मैं , निशी के साथ ------ दो घडी वो जो पास आ बैठी !!!! तीन--- मैं , निशी के साथ ------
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जब होली मे रंग उड गये---

बात कोई ३ साल पहले की है । बहुत दिनो से मेरा नागपुर जाना नही हुआ था। मेरी बेटी ने १२वीं की परीक्षा दी थी उस वर्ष । मैने सोचा कि कालेज मे एड्मिशन लेने के पहले एक बार अपनी दादी का आशिर्वाद भी ले लेगी और मेरा कुछ आफ़िस का काम ( कम्पेन्सेशन का ) भी निपटा