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उड़ीसा में गुस्ताख- तस्वीरों में भीतरकनिका

गुस्ताख उड़ीसा गया था। कवरेज के सिलसिले में। वहां मैं भीतरकनिका नैशनल पार्क के भीतर गया था। उसकी तस्वीरों का लुत्फ उठाइए। भीतरकनिका नैशनल पार्क घड़ियालों के लिए मशहूर है। वे अक्सर शाम को किनारे निकलते थे। भीतरकनिका में सूर्योदय और सूर्यास्त बेहद मनोरम
 
गुस्ताख़ मंजीत
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बादलों में गुस्ताख़

रावण दहन का दिन था.. घर के लोग पूरा जोर लगा रहे थे कि रावण के पुतला दहन हो तो उसका चश्मदीद मैं भी बनूं। लेकिन मुझे रावण से बहुत सहानुभूति रही है। सहानुभूति के कारणों का हवाला बाद में दूंगा लेकिन सच तो यह है कि रावण दहन का दॉश्य मुझसे झेला नहीं जाता।
 
गुस्ताख़
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आखिर क्यों करे इन बुजुर्गों का सम्मान?

सप्ताह का आखिरी दिन मेरे लिए कुछ खास होता है। इस दिन मेरी छुट्टी होती है और अपने मन-मुताबिक मैं अपनी दिनचर्या तय करता हूं। दिन का ज्यादातर समय अपने इष्ट-मित्र से मिलने में बीतता है और मुमकिन हुआ तो रात भी किसी दोस्त के घर पर ही गुजरती है।खैर, इस शनिवार
 
हेमेन्द्र मिश्र
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बंगाल यात्राः आनंद अखंड घना था

पिछले एक माह से बंगाल की यात्रा पर था। क्या कहें.. मन में शुरु से इच्छा थी कि इस राजनैतिक रुप से बेहद सचेत राज्य को कवर करूं. इस लोस चुनाव ने यह अभिलाषा भी पूर्ण कर दी। अभिलाषा भी ऐसे पूरी हुई कि मज़ा आ गया। कोलकाता से सीधे मालदा जाना था। २३ अप्रैल क
 
गुस्ताख़