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यह भी मेरा महान देश है....!

सात अक्तूबर को जब फ्रैंकफुर्ट हवाई अड्डे से फ्रेइबुर्ग जाने के लिए बाहर आया तो चारों ओर से रंगों ने घेर लिया । ये अपरिचित से लगते सम्मोहक रंग थे । यहाँ मैं रंगों के किसी मेले या महानगर में पहुँच गया था । यह हेमंत का मौसम था । पेड़ों से पत्ते जब आने वा
 
Uday Prakash
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फ्राइबर्ग की कुछ छवियां

फ्राइबर्ग एक छोटा सा शहर है। यह शिक्षा, पर्यावरण अध्ययन और शोध और वैकल्पिक जीवन-समाज की खोज के लिए जाना जाता है। आबादी मुश्किल से ढाई लाख की है लेकिन पार्कों और बाजारों में चहल-पहल बनी रहती है। जहां मैं हूं, वहां से पांच मिनट पैदल चलने पर पहाड़ शुरू
 
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कुशीनगर से लौटकर

कुशीनगर और गोरखपुर से एक सप्ताह की यात्रा से आज ही लौटा हूं। यह एक अविस्मरणीय यात्रा थी। वह स्थान, जहां बुद्ध की विशाल प्रतिमा आज भी अपने निर्वाण की अंतिम मुद्रा में सोई हुई है। मैं यहां अपने नये उपन्यास 'चीना बाबा' के मुख्य पात्र चीना बाबा की खोज मे
 
Uday Prakash
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अमरावती की विदेश यात्रा: मेरा दागिस्तान -४

यह एक अलग तरह की फोटो प्रदर्शनी थी। कैमरे का इस्तेमाल मनुष्यों के चेहरों को पढ़ने , देखने और उनकी मार्फोलाजी के अध्ययन के लिए ही नहीं , उन चेहरों के पीछे के जीवन को पकड़ने और उन्हें किसी खास क्षण में वहां प्रस्तुत करने के लिए किया गया था। सभी चेहरों
 
Uday Prakash
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साम्भा जी भगत का जादू

कोई सेट पे बैठा है / कोई नेट पे बैठा है / इंटरनेट पे बैठा है / स्पाइस जेट पे बैठा है / जंबो जेट पे बैठा है / ..... अपन तो साला कबसे खाली पेट पे बैठा है / ..... सूखे खेत पे बैठा है / टूटे मेड पे बैठा है ..../'' और ' कोई दिल्ली में बैठा है भाई / कोई बम
 
Uday Prakash