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यात्रा क्षेपक

--हरिशंकर राढ़ीमैं अपनी यात्रा जारी रखता किन्तु न जाने इस बार मेरा सोचा ठीक से चल नहीं रहा है। व्यवधान हैं कि चिपक कर बैठ गए हैं। खैर, मैं कोडाईकैनाल से मदुराई पहुँचूँ और आगे की यात्रा का अनुभव आपसे बांटूं , इस बीच में एक क्षेपक और जुड़ जाता है। इस क्षेपक
 
Hari Shanker Rarhi
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बैजनाथ यात्रा-1

मुझे राम बाबू चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन पर मिला। रात को दस बजे। उसे बुलाया तो था आठ बजे ही, लेकिन गुडगाँव से आते समय धौला कुआँ के पास जाम में फंस गया। खैर, चलो दस बजे ही सही, आ तो गया। एक भारी भरकम बैग भी ले रहा था। पहाड़ की सर्दी से बचने का पूरा इंतज
 
मुसाफिर जाट