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यह बचपन कितना निर्द्वन्द?

यह बचपन कितना निर्द्वन्द, खुश हैं ये कितने रंगों के संग। मस्ती करते, धूम मचाते, आगे – पीछे दौड़ लगाते, नीला -पीला और हरा, लाल, गुलाल कर दें ये धरा, नहीं भंग पी फिर भी झूमै जैसे मतंग । यह बचपन कितना निर्द्वन्द? नाचे – गाएं धूम मचाएं, भर -भर