यह बचपन कितना निर्द्वन्द?
यह बचपन कितना निर्द्वन्द,
खुश हैं ये कितने रंगों के संग।
मस्ती करते, धूम मचाते,
आगे – पीछे दौड़ लगाते,
नीला -पीला और हरा,
लाल, गुलाल कर दें ये धरा,
नहीं भंग पी फिर भी झूमै जैसे मतंग ।
यह बचपन कितना निर्द्वन्द?
नाचे – गाएं धूम मचाएं,
भर -भर
Jan 16 2010 12:42 AM



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