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मौन की बातें

जब अकेलापन सताता है...तब इंसान एक दोस्त की तलाश करता है...जिसके साथ अपने दिल की बातें बाँट सके...खुलकर हंस ले...जी भरकर रो ले...मेरे मामले में कुछ अलग हुआ..मुझे दोस्त तो मिला,लेकिन कोई हाड-मांस वाला नहीं...बल्कि एक मशीन...और उसकी आत्मा...इन्टरनेट ...जो
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नयन-मर्यादा

ओ दूर-दूर रहने वाले! हमसे भी दो बातें कर लो. इतना दूर नहीं रहते जो मिलने में भी मुश्किल हो. मौन बहुत रहते हो, दूरी पहले से, ये चुप छोड़ो. कभी-कभी तो आते हैं, मिलते हैं. हमसे हँस बोलो. जितना आते पास तिहारे उतना नयन झुकाते हो. लज्जा है ये नहीं
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शमशान के सन्नाटे में ......

शमशान के सन्नाटे में नीरवता ,नि:स्तब्धताको भंग करके आती हुई पदचापें,रुदन ,क्रंदन ,सिसकियाँ ,हिचकियाँके साथ आती परछाईयाँ ,तरह तरह से ज़िंदगी के अंत हैं ,यहाँ पहुँच कर तो सभी संत हैंकैसे कौन जानेगा, कौन है कौन ?लोग अनुत्तरित ,प्रश्न हैं मौन ....नि:स्पंदन
 
अनुपम अग्रवाल
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नीरवता की धड़कन ---डा श्याम गुप्ता की कविता -----

जग की भीड़-भाड़ से होकर, दूर अगर तू शान्ति चाहता | जग की भीड़-भाड़ से होकर , त्रस्त अगर विश्रांति चाहता | आजाओ इस निर्जन वन में , नदी किनारे खुले गगन में | नीरवता के मौन -मुखर में , तुझको मन की शान्ति मिलेगी | चुप-चुप इस निश्शब्द सघन में, तन-मन की वि
 
Dr. shyam gupta
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हालांकि मैने छोड़ दिए हैं देखने वे ख्वाब !!!

हालांकि, मैने छोड़ दिए हैं देखने वे ख्वाब और जिक्र करना भी... पर, मेरे कंधे पर अभी भी आ झुकता है चेहरा तेरा और मेरे सीने को जब तब घेर लेती हैं बाजुएं तुम्हारी ख़ास कर तब, जब हम टहलते हुए निकल जाते हैं साहिल तकaa और बैठ जाते हैं रेत पर मेरी कनपटियो को
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दिल आज शायर है...

मैं समझ नहीं पाता कि प्रोफेशनली कवितायें कैसे लिख ली जाती हैं। मैं तो लेखों में ही खुद को ज्यादा सहज पाता हूँ। हाँ कभी-कभी कुछ भावनाएं सिर्फ कविताओं में ही व्यक्त हो पाती हैं, और यहीं आकर यह पंक्तियाँ सच ही लगती हैं कि 'वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा
 
Abhishek Mishra
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