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पुरस्‍कार प्रकरण: गगन गिल के पक्ष में तेजी ग्रोवर का पत्र

साजिद रशीद और चिदंबरम की जबान एक क्‍यों है? [15 June 2010 | Read Comments | ] विश्‍वदीपक ♦ रशीद ने माओवादियों के प्रतिरोध को ‘सामूहिक दमन’ की कार्रवाई बताया है। लगता है वो ‘वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति’ में भरोसा रखते हैं। वरना कोई कारण नहीं कि वो
 
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राजकिशोर भी सनसनी फैलाने का कोई मौका नहीं छोड़ते

भोपाल मर रहा था, अर्जुन सिंह जहाज में उड़ रहे थे [11 June 2010 | Read Comments | ] आनंद स्‍वरूप वर्मा ♦ स्पष्ट चेतावनी के बावजूद अर्जुन सिंह को हिरासत में क्यों नहीं लिया गया? इतना ही नहीं, 6 दिसंबर को जिस समय समूचा भोपाल मौत की दहशत में डूबा
 
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तुम्‍हारी भाषा गंदी हो गयी है, उसमें विचार आ गये हैं

स्टिंग में फंसे... [4 June 2010 | Read Comments | ] डेस्‍क ♦ प्रयाग महिला विद्यापीठ में एमए हिंदी की मौखिक परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों से पांच-पांच सौ रुपये घूस लेते हुए एक अध्‍यापिका कैमरे में कैद हो गयी है। Read the full story »दलित की
 
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मीरा कुमार ने कहा कुछ, एनडीटीवी ने दिखाया कुछ!

साहित्‍यकारों का स्‍तर [2 June 2010 | Read Comments | ] अंशुमाली रस्‍तोगी ♦ हमें पता चल रहा है कि हमारी हिंदी के साहित्यकार हैं कैसे? उनके कथित लेखन और व्यवाहरिकता में कितना और कहां-कहां अंतर है। Read the full story »मणिपुर का माखौल [2 June
 
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एक लेखक के अपमान का विरोध या गैंगवार, साफ करें

झूठा सच के छिलके [29 May 2010 | Read Comments | ] रीतेश ♦ कोडरमा के इस पाठक परिवार ने इतने झूठ बोले हैं कि उसकी गिनती नहीं है। झूठ बोलने के कारण पाठक जी का परिवार खुद ही नंगा हो रहा है। Read the full story »क्‍यों डरें इससे? [29 May 2010 |
 
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रंग प्रसंग ने अजित राय का खेल बिगाड़ा, जनसत्ता से गये

इस दुनिया में आविष्‍कार के लिए कोई जगह नहीं! [19 May 2010 | Read Comments | ] विश्‍वदीपक ♦ साहित्य के नाम पर जो कूड़ा करकट पेश किया जा रहा, वो पढ़ने लायक नहीं है इसीलिए नहीं पढ़ा जा रहा है। और इसीलिए मीडिया में उसे जगह भी नहीं मिल रही है।
 
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लेखक बेहतर राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता हो सकते हैं, पर वे सुस्‍त हैं

ये तो पहली झांकी है, "मथुरा-काशी" बाकी है [18 May 2010 | Read Comments | ] पशुपति शर्मा ♦ चिदंबरमजी, आपकी नीयत को लेकर सवाल उठाने का मेरा इरादा कतई नहीं है। हो सकता है आप देश में अमनबहाली का सपना देख रहे हों पर साथ ही आप ये भी तय कर लीजिए कि ये
 
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साहित्‍य और मीडिया पर सेमिनार आज, हैबिटैट आएं

वीकेंड प्रोटेस्‍ट प्रोग्राम! [17 May 2010 | Read Comments | ] विजय प्रताप ♦ जामिया मिल्लिया इस्‍लामिया व नोएडा से आये हमारे साथियों को भी ऐसे कार्यक्रम की उम्मीद नहीं थी। उनकी भाषा में कहें तो ‘पैसा डांढ गया।’ Read the full story »राजपथ पर
 
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वर्धा के बाद इंद्रप्रस्‍थ विवि में भी गुंडई पर उतरे कुलपति

दो कवि, एक शाम [14 May 2010 | Read Comments | ] मिथिलेश श्रीवास्‍तव ♦ उस दिन हमने उस घटना को याद किया, जब दूरदर्शन पर आलोकधन्‍वा को बोलना सुनते हुए उनसे अगला प्रश्‍न करना मैं भूल गया। Read the full story »ये जातीय हत्‍याएं हैं [15 May 2010
 
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मतंग ने छह की बलि मांगी, 35 ने सिर आगे किया

आलोकधन्‍वा का साथ [14 May 2010 | Read Comments | ] मिथिलेश श्रीवास्‍तव ♦ उस दिन हमने उस घटना को याद किया, जब दूरदर्शन पर आलोकधन्‍वा को बोलना सुनते हुए उनसे अगला प्रश्‍न करना मैं भूल गया। Read the full story »एस वन से चिट्ठी [14 May 2010 |
 
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खबर का असर : रंग प्रसंग के चार संपादक बने

आलोकधन्‍वा का साथ [14 May 2010 | Read Comments | ] मिथिलेश श्रीवास्‍तव ♦ उस दिन हमने उस घटना को याद किया, जब दूरदर्शन पर आलोकधन्‍वा को बोलना सुनते हुए उनसे अगला प्रश्‍न करना मैं भूल गया। Read the full story »एस वन से चिट्ठी [14 May 2010 |
 
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प्रियभांशु रंजन पर मीडिया ट्रायल : ये ड्रामा कब थमेगा?

जाति से डर क्‍यों? [08 May 2010 | Read Comments | ] नवीन ♦ मैं विनोद जी से पूछना चाहता हूं कि देश में जितने अंतरजातीय विवाह सन 90 से लेकर आज तक हुए हैं, क्या उनकी संख्या 1950 से 90 तक से कम है? Read the full story »अनैतिक और अपराध [08 May 2010
 
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निरुपमा को न्‍याय के लिए रौशन हुई संघर्ष की हजारों लौ

जाति से डर क्‍यों? [08 May 2010 | Read Comments | ] नवीन ♦ मैं विनोद जी से पूछना चाहता हूं कि देश में जितने अंतरजातीय विवाह सन 90 से लेकर आज तक हुए हैं, क्या उनकी संख्या 1950 से 90 तक से कम है? Read the full story »अनैतिक और अपराध [08 May 2010
 
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सहारा से गये, लेकिन फायदे में रहे संजीव श्रीवास्‍तव

जाति से डर क्‍यों? [08 May 2010 | Read Comments | ] नवीन ♦ मैं विनोद जी से पूछना चाहता हूं कि देश में जितने अंतरजातीय विवाह सन 90 से लेकर आज तक हुए हैं, क्या उनकी संख्या 1950 से 90 तक से कम है? Read the full story »अनैतिक और अपराध [08 May 2010
 
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जीवन के पक्ष में, मृत्यु के विरुद्ध : जंतर मंतर पर जुटान

जाति से डर क्‍यों? [08 May 2010 | Read Comments | ] नवीन ♦ मैं विनोद जी से पूछना चाहता हूं कि देश में जितने अंतरजातीय विवाह सन 90 से लेकर आज तक हुए हैं, क्या उनकी संख्या 1950 से 90 तक से कम है? Read the full story »प्रियभांशु पर लाल-पीले [08
 
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अंग्रेजी में फेल हुए, हिंदी में टॉप : मीडिया ने मुंह चुराया

सत्ता के ये दलाल [06 May 2010 | Read Comments | ] विश्‍वदीपक ♦ इन जैसे लोग अगर सेफ्टी वॉल्व की तरह काम नहीं करते तो नव उदारवादवाद की अंध समर्थक सरकार के लिए माओवादी सबसे बड़ा खतरा नहीं बनते। Read the full story »गोविंद मूनिस नहीं रहे [06 May
 
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बेशर्म बिजनेस स्‍टैंडर्ड ने भी निरुपमा को नहीं बख्‍शा

सत्ता के ये दलाल [06 May 2010 | Read Comments | ] विश्‍वदीपक ♦ इन जैसे लोग अगर सेफ्टी वॉल्व की तरह काम नहीं करते तो नव उदारवादवाद की अंध समर्थक सरकार के लिए माओवादी सबसे बड़ा खतरा नहीं बनते। Read the full story »निरु हत्‍याकांड के सबक [06 May
 
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अजित राय ने एक दिन में लाभ के तीन तीन पद हथियाये

पंकज विष्‍ट की लंतरानी [04 May 2010 | Read Comments | ] आलोक श्रीवास्‍तव ♦ आपको कैसे पता कि किन किताबों पर रॉयल्टी दी जाती है, किन पर नहीं? क्या आपने इन प्रकाशनों से छपी किताब के बारे में तफ्तीश कर ली है? Read the full story »भागी हुई लड़कियां
 
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देश भर में फैले एफएम गोल्‍ड के श्रोताओ एक हो

शोकसभा आज [01 May 2010 | Read Comments | ] डेस्‍क ♦ बिजनेस स्‍टैंडर्ड की पत्रकार और आईआईएमसी की पूर्व छात्र निरुपमा के निधन से दुखी उनके साथियों ने आईआईएमसी में आज एक शोकसभा रखी है। Read the full story »आज शनिवारी चर्चा [01 May 2010 | Read
 
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“आपकी दी गयी भैंस मेरे लिए जीवनदान साबित होगी!”

बॉस ने कहा, शराब नहीं पीयोगी तो नौकरी जाएगी [28 April 2010 | Read Comments | ] विनीत ♦ स्टार न्यूज की ऊंची कुर्सी पर बैठे अविनाश पांडे और गौतम शर्मा नाम के शख्स ने स्टार न्यूज में बतौर मैनेजर एड सेल्स ज्वाइन करनेवाली सायमा सहर को लगातार मानसिक
 
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प्रधानमंत्री जी, क्‍या आप हमेशा कंडोम लेकर चलते हैं?

खबरों की ट्विटर गली [28 April 2010 | Read Comments | ] आशीष तिवारी ♦ अब तो ये पूरी तरह साफ हो गया है कि देश में अगर कहीं कुछ घटता है तो वो है ट्विटर। ट्विटर न हो तो देश में सन्नाटा छा जाएगा। Read the full story »राजकिशोर की जाति [27 April 2010
 
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आंदोलन की राह पर हमारकर्मी, एक मई से करेंगे तालाबंदी

रिपोर्टर ही बने रहना चाहते थे उदयन शर्मा [23 April 2010 | Read Comments | ] सलीम अख्‍तर सिद्दीक़ी ♦ उदयन शर्मा की पुण्य तिथि 23 अप्रैल पर उनको याद करना 1977 में शुरू हुई उस हिंदी पत्रकारिता को भी याद करना है, जब उदयन शर्मा, एमजे अकबर और एसपी
 
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सीएससी की भारतीय शाखाओं में मोहल्‍ला लाइव पर बैन

मीट द एडिटर में आमिर [30 March 2010 | Read Comments | ] डेस्‍क ♦ बुधवार को आईआईसी, दिल्‍ली में अभिनेता आमिर खान पत्रकारों-संपादकों से मिलेंगे। बीईए का यह आयोजन 'इनफारमल' और 'आफ कैमरा' है। Read the full story » गणतंत्र की कथा [30 March 2010
 
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देश में परदेसी कॉर्पोरेट कंपनियां : शोषण की नयी कहानी

सात खून माफ [30 March 2010 | Read Comments | ] अब्राहम हिंदीवाला ♦ वह गुपचुप तरीके से शूटिंग के लिए निकलीं। बताया भी नहीं। ट्विटर पर भी नहीं लिखा, लेकिन किसी ने उनकी चंद तस्‍वीरें ऑनलाइन कर दीं। Read the full story » गणतंत्र की कथा [30 March
 
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संगीत पर सिनेमा, चार साल और चार दिन की रिलीज

संपादकों की चिंतन बैठक [24 March 2010 | Read Comments | ] कुलदीप नैयर ♦ राजनीतिक दलों ने पैसा दिया और मालिक, उम्मीदवार सभी इस पाप में भागीदार रहे। इमरजेंसी में हम डर से और अब पैसे के लिए गिर गये। Read the full story »ये हृदयहीन कम्‍युनिस्‍ट!
 
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हिंदी के हुसैन का सम्‍मान बड़ा, पुरस्‍कारों की ऐसी की तैसी

आईबीएन में छंटनी [12 March 2010 | Read Comments | ] डेस्‍क ♦ कुछ ही महीने पहले आवाज के ढाई सौ कर्मियों को सड़क का रास्‍ता दिखाने के बाद टीवी 18 ग्रुप ने अब लोकमत के 70 कर्मियों को निकाल दिया है। Read the full story »अखबार पर आरोप [14 March 2010
 
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पंडितों ने सभा की, पंडित प्रभाष जोशी को याद किया

समरेंद्र ♦ दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में प्रभाष जोशी पर लिखी गयी पुस्तक का लोकार्पण हुआ। इसे आप महज संयोग कहेंगे या क्‍या कहेंगे कि उस लोकार्पण में जितने लोगों ने प्रभाष जोशी के बारे में अपनी राय रखी, उनमें से एक को छोड़ कर कोई भी गैर ब्राह्मण
 
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“प्रभाष जी गांधीवादी निर्भयता के आखिरी प्रवक्ता थे”

मोहल्‍ला लाइव संवाददाता ♦ अशोक वाजपेयी ने प्रभाषजी को याद करते हुए कहा कि प्रभाषजी उन गिने चुने पत्रकारों में थे, जिनकी आवाज साहित्यिक जगत तक में साफ सुनी जाती थी। उन्होंने राम मनोहर लोहिया और राजेंद्र माथुर के साथ प्रभाषजी की तुलना करते हुए कहा कि ये वे
 
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