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एहसास प्यार का..

माना की बहुत गम हैं तेरे फ़साने मेंमाना की दिल टूटा है तेरा भी ज़माने मेंपर एक बार नज़रें उठा के देख तो लो ऐ दोस्त..खुशियाँ फिर से आयीं हैं तेरे पास किसी बहाने से. 
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कुछ हम को ज़माने ने वो गीत सुनाये हैं

कुछ हम को ज़माने ने वो गीत सुनाये हैंदो अश्क मोहब्बत के आंखों में समाये हैं । माना के मुलाकातों का वक्त नहीं आयाहर रात को ख़्वाबों में तशरीफ वो लाये हैं । इनकार की आदत तो दिलबर को नहीं मेरेये बात अलग है कि वादे न निभाये हैं । करते थे कभी उन की सूरत से
 
गजेन्द्र बिष्ट
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Meri Aamkh Jo Khuli To

मुझको तुमसा कोई न मिला आँसुओं से आँखों का आईना धुला ज़हन के दरवाज़े पर टहलता रहा कोई सारी-सारी रात, मेरी आँख जो खुली तो… मैं झुलस गया तमाम बरस इक खा़ब के लिए आँखें गड़ाए बैठा रहा मैं, मेरी आँखों से - यह परदा भी सरक गया उजली-उजली रात भी इक अंधा कमरा लगी
 
विनय ‘नज़र’
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मागों तो दिल और जाँ सब कुछ तुमको दे दूंगीं

वो दूर से देख मुस्कुराती शोख चंचल नयनो वाली सुकन्या मुझे भा गई ऊपर की जितनी भी तारिकाएँ हैं उनका हुस्न फीका पड़ गया उसके सामने। मैंने पूछा - मुझे ,कुछ देर का वक्त मिलेगा क्यों नहीं ! ज़रूर मिलेगा । उत्तर में थी मादक खनक ... एक - एक काफी का आफ़र उसमें
 
गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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...तो मुहब्बत नहीं मिलती

दिल में ना हो जुर्रत तो मुहब्बत नहीं मिलतीखैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलतीकुछ लोग यूं ही शहर में हम से भी खफा हैंहर एक से अपनी भी तबीयत नहीं मिलतीदेखा था जिसे मैंने कोई और था शायदवो कौन है जिस से तेरी सूरत नहीं मिलतीहंसते हुए चेहरों से है बाज़ार की
 
Nikhil Srivastava