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विद्यापति भगवती वंदना
जय जय भैरब असुर भयाउनी ,पशुपति भामिनी माया सहज सुमति वर दिअ है गोसाउनि , अनुगति गत तूअ पाया बासर रइनी शवासन शोभित ,चरण चन्द्र मणि चूडा कतेक दैत्य मरि मुख मेलल, कतेक उगली कयल कूड़ा साँवर बदन नयन अनुराज्जित , जल्द जोग फूल कोका कट कट विकट ओठ पुट पांडरी,
Mar 06 2010 09:20 PM



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