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मैं और तन्हाई - भाग १

इक रात थी काली अंधियारीजीने की चाह से मैं हारीन खुला था आगे कोई पथलगा, थम गया है जीवन-रथन पास में था मेरे कोईमैं बिलख-बिलख कर बस रोईइक साथ में थे आंसु और गमनैना रहते थे हर दम नमफ़िर एक घडी ऐसी आईआंखें भी मेरी पथराईमैं गम थी या गम ही मैं थाकोई भेद न था ,
 
सीमा सचदेव