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लिखने कुछ और बैठा था...लिख बैठा माँ के बारे में।

गाँव के कच्चे रास्तों से निकलकर शहर की चमचमाती सड़कों पर आ पहुंचा हूँ। इस दौरान काफी कुछ छूटा है, लेकिन एक लत नहीं छूटी, फकीरों की तरह अपनी ही मस्ती में गाने की, हाँ स्टेज से मुझे डर लगता है। गाँवों की गलियाँ, खेतों की मिट्टी, खेतों को गाँवों से जोड़ते
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पुरानी तस्वीर

कल पलटते उस पुरानी एल्बम के पन्ने -फिर मिली एक तस्वीर पे, वो बेकरार शामकुछ शरारतें हमेशा की तरह मुठ्ठियों में भींचेवो शोख चंचल आँखे कुछ मस्ती में नीचे खीचें जुल्फे रब्त पर एक सवाल की तरह उलझी सी,और एक लम्बी चुप्पी की सिरहन,
 
Sudhir (सुधीर)
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उस दिन का पागलपन

दो बजे में कुछ मिनट बाकी थे, और स्कूल की छुट्टी वाली घंटी बजने वाली थी, लेकिन हम दूसरे गाँव से पढ़ने आते थे, इसलिए हमारे लिए स्कूल की छुट्टी वाली घंटी से ज्यादा महत्वपूर्ण था बस का हॉर्न। उस दिन जैसे ही बस ने गाँव के दूसरे बस स्टॉप से हॉर्न  दिया, तो
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"मैं"

मैं से शुरू सारे सवाल,मैं में छुपे सारे जवाब,मैं कभी दुनिया से बेहतर,मैं कभी सबसे ख़राब,मैं की है अपनी ही मस्ती,मैं उम्र भर का नकाब,मैं गलतियों का पुलिंदा,मैं फिर भी सबसे लाजवाब,मैं परेशानी का सबब,मैं गुनाहों की वजह,मैं से जुड़े गम सैकड़ो हैं,मैं तब भी दे
 
Yogesh Sharma
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गम है कि जिन्दा हूँ, वरना खुशियों से तो मर जाता

गम है कि जिन्दा हूँ, वरना खुशियों से तो मर जातातनहाइयों ने थामे रखा, वरना जमाने में किधर जाता सौ बार हुआ क़त्ल रहा फिर भी धड़कता मेरा दिलमाजी की थी चाहत नहीं तो इक झोके से बिखर जाता न छिपा ज़ालिम पर्दों में यूँ, इस गुल-ए-हुस्न को अपने होती
 
Sudhir (सुधीर)
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तेरे तसव्वुर से मैं कह पाता, मैं वो सब जो कहना भूल गया

तुम जाओगे तो क़यामत होगी, रुक जाओगे तो क़यामत होगी हाय! इसी कशमकश में,  मैं तुझसे हाल-ए-दिल कहना भूल गयाकाश थाम कर यादों का आइना, पलट कर कुछ वक्त के पन्ने,तेरे तसव्वुर से मैं कह पाता, मैं वो सब जो कहना भूल गया वो रब्त जिसे बाँध न
 
Sudhir (सुधीर)
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मेरे विचार

मैं निशांत कुमार कंप्यूटर विज्ञान का छात्र हूँ और यहाँ विज्ञान पे कुछ लिखने का सोच रहा हूँ| आप सभी ब्लॉग पाठक सोच रहे होंगे एक तकनीक विज्ञान का छात्र मूल विज्ञान के बारे में क्या लिख सकता है, कहीं – न – कहीं से ये सत्य भी है कि हम तकनीकी ज्ञान लेकर
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जब मुश्किल आई, माँ की दुआ ने बचा लिया

var BW = new UWA.BlogWidget({moduleUrl:'http://www.netvibes.com/modules/feedReader/feedReader.php?feedUrl=http%3A%2F%2Fpunjab84.blogspot.com%2Ffeeds%2Fposts%2Fdefault'});BW.setPreferencesValues({'nbTitles':'2',
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तेरी रुसवाई से, मेरी बेवफाई का इल्जाम अच्छा है

यह मेरे दर्द का फ़साना, कुछ झूठा कुछ सच्चा है शब-ए-हिज्र की हैं बातें, तुम ही सुनते तो अच्छा है कहकर तो देखो कभी, परियों की बातें उनसे हर संजीदा दिल में, सहमता हुआ एक बच्चा है इसी बहाने पहचान हो गई दोस्त दुश्मनों की, भरी रईसी से, मेरा मुफलिसी हाल अच्छ
 
Sudhir (सुधीर)
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घी का दीपक..

इस दीपावली एक घी का दीपक छत की उस मुंडेर पर भी रखा.. जहाँ आकर तुम्हारी यादें मुझसे मिला करती थी.. मेरे जीवन को रोशन किया करती थी.. शायद दीपक की रोशनी उन यादों को भटकी राह दिखाये... एक उम्मीद बाकी है अभी!!
 
साधवी
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तुझे मुझसे प्यार न करना हैं, तो न कर

तुझे मुझसे प्यार न करना हैं, तो न कर ,फ़िर नज़रें भी न मिला, यूँ बेकरार भी न कर। न देख इन मस्त निगाहों से मुझे ,न हिला, रह रह कर गेसुओं की चिलमन। दिलफेक नहीं पर आशिक मिजाज है दिल ,रह-रह कर जुल्फ-ऐ-यार से उलझता है मन। न छोड़, ठण्डी ठण्डी आहें छिप-छिपकर,न
 
Sudhir (सुधीर)
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तू

चमन से आती हवाओं मेंतेरी छुअन काअहसास है...दूर रह कर भीतू कितनीपास है...
 
साधवी
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मेरी दस नंबरी टी-शर्ट

मुझे टी-शर्टों से बेहद प्यार था, मुझे टी-शर्ट और जींस पहना शुरू से ही अच्छा लगता है, लेकिन आजकल टी-शर्ट पहना कम हो गया, क्योंकि मेरा पेट बाहर आ गया है। जब मैंने वेबदुनिया को ज्वॉइन किया, तो मुझे पता चला कि वेबदुनिया में ऑफिस ड्रेस रूल हैं, लेकिन मैं बंदा
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क्या गिला करें हम अपने मासूम यार का...

क्या गिला करें हम अपने मासूम यार का।किस किस से छिपायें नाम नादाँ यार का।जिनके लिए बदनाम हुए, वो किस्से हमारे आम करे जाते हैंकोई तो सिखाओ यारों उन्हें सलीका इश्क के इज़हार का ।जिस पर भरोसा किया, उन्होंने ही तमाशा बनाया प्यार काउम्र हुई न जाने कब आयेगा अब
 
Sudhir (सुधीर)
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तेरे बिना एक और दिन, एक और लम्हा

तेरे बिना एक और दिन, एक और लम्हा,यादों के सिवा कुछ और नहीं, बस तन्हा-तन्हा।यादों के दो हर्फ़ लिए, आयत सा मैं पढता जाता,तेरे ही नाम के नुक्ते में,जीवन का हर अर्श मैं पाता हर पल महसूस किया हैं तुझको अपनी हर बीती धड़कन में,तेरी यादों के आँचल में ढांपा हैं
 
Sudhir (सुधीर)
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मेरे टूटे रिश्ते का हिस्सा होगा शायद!!

आँखों के करीने में कुछ तो चुभता हैंमेरे टूटे रिश्ते का हिस्सा होगा शायद!!एक उम्र हुई, जब वक्त के धुंधले में,अनजाने में दुनियादारी की ठोकर से,तेरे मेरे ख्याबों पर पाँव पड़ा था मेरा।मेरे मजबूर हाथों से फिसला थाएक संग चलता संग-सा रिश्तापर बिखरा बेआवाज़ वो
 
Sudhir (सुधीर)
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