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अब तो ख़ैर हो मौला!

बिहार में बाढ़ से तबाही पर जितना लिखा-दिखाया जाए कम है। लोग त्राहि त्राहि कर रहे हैं। सैंकड़ो बह गए हैं। लाखों फंसे हैं। दाने दाने को मोहताज़ हैं। सही में राहत पहुंचाने की बजाए राज्य और केन्द्र की राजनीति जारी है। हालात पर जितना रोया जाए, बयानबाज़ी क
 
उमाशंकर सिंह
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हमारा बिगड़ा मुकद्दर है... क्या किया जाए

बिहार का मंज़र हमारा बिगड़ा मुकद्दर है क्या किया जाए हमारे घर में समंदर है क्या किया जाए है भूख प्यास की शिद्दत हमारे चेहरों पे ये अब बिहार का मंज़र है क्या किया जाए! -तहसीन मुनव्वर
 
उमाशंकर सिंह