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देख तो दिल के जाँ से उठता है - मेंहदी हसन

Movie: The Finest Ghazals of Mehdi Hassan (Non-Film)Singer(s): Mehdi HasanMusic Director: Mehdi HasanLyricist: Mir Taqi MirActors/Actresses: Year/Decade: 1985, 1980sदेख तो दिल के जाँ से उठता हैये धुवाँ सा कहाँ से उठता हैगोर किस दिलजले की है ये फ़लक़शोला एक
 
निशांत मिश्र - Nishant Mishra
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फ़ूल ही फ़ूल खिल उठे मेरे पैमाने में: मेहदी हसन की आवाज और राग गौड़ मल्हार

दोस्तों सावन का महीना चालू हो गया है, भले ही जम के पानी ना बरस रहा हो लेकिन हल्की फुहारें ही सही; तन मन को शीतलता तो दे रही है, ऐसे में अगर राग मल्हार सुना जाये और वो भी शहंशाह ए गज़ल मेहदी हसन साहब के स्वर में तो कितना आनन्द आयेगा? हसन साहब बीमार हैं
 
सागर नाहर
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सुख़नसाज़ की सौवीं पोस्ट

हालांकि यह ग़ज़ल पहले भी यहां सुनवाई जा चुकी है. बहुत विख्यात है. बहुत बहुत बार सुनी-सुनाई जा चुकी है मगर इस ब्लॉग की सौवीं पोस्ट के लिए मुझे यही सबसे उचित लगी. हफ़ीज़ जालन्धरी साहब का क़लाम. उस्ताद मेहदी हसन ख़ान साहेब की वही मख़मल आवाज़ ... उफ़! ज़माने भर के
 
Ashok Pande