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इंसानियत गढती है स्त्री...किन्तु

हमे महिला और पुरुष में कोई मतभेद नही करना चाहिए, वे सिर्फ शारीरिक रूप  से अलग है. बापूजी कि बात आज भी उतनी ही प्रासंगिक लगती है जितनी पहले थी. आज भी हमारे समाज में महिलाए कई तरह के भेदवाव का शिकार होती है. मै बापू के विचारों कों एवं उनके अर्थो
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क्या आप मेरी होली कि प्यारी सूची में है ? बोलो- ब्लोगर बंघुओ " ओल इज वेल"

कल होलिका दहन था और आज घुलेटी है. रंगो का यह त्यौहार मन कों सुकून प्रदान करने वाले है. लाल, गुलाबी, पिला, नीला इन्द्रधनुषी रंगो में मानो सारा संसार डूब गया है . विभिन्न रंग हमारे जीवन में प्रेम, उमंग , भाईचारे कों बढाते है. आपसी गिला सिकवो कों त्याग कर