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मैं हूँ आज की नारी

मैं हूँ आज की नारी..मैं ही हूँ दुर्गा,मैं  ही सरस्वती...मैं कृष्ण की राधा भी हूँ..और सीता भी..फिर आज क्यूँ,कभी लज्जित भी होना पड़ता है मुझे..मैं तो बहन भी हूँ और बेटी भी..फिर भी क्यूँ,इस समाज में.. ..अक्सर उचित सम्मान,और अधिकार से,वंचित  रह जाती
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एक छोटी बच्ची और उसका फूलों का गुलदस्ता..

बात आज शाम की है, जब मैं ऑफिस से वापस घर आ रहा था.एक ऐसी बात हुई जो वैसे तो कोई बड़ी नहीं लेकिन मैं बड़ी देर तक सोचता रहा.पता नहीं ये बात ब्लॉग पे पोस्ट करनी चाहिए या नहीं लेकिन मैं पोस्ट कर रहा हूँ.मैं रहता हूँ बैंगलोर में और यहाँ ऐ.सी. वोल्वो बस बहुत
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कविताओं में भी एक दुनिया होती है...

कविताओं में भी एक दुनिया होती है...कविता कभी कवि की कल्पना होती है,तो कभी यह विचारों का प्रवाह होती है |कभी यह लोगों को व्यंग्य से हंसाती है,तो कभी लोगों को वास्तविकता से रुलाती है |कभी यह पुष्प की अभिलाषा होती है,और समाज में चेतना फैलाती है ;तो कभी
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अब भागना है...

मैं जानता हूँ मुझे वापस यहीं आना है ,इन्हीं बंद कमरों में , इन्हीं चारदिवारियो में बंद रहना है..फिर भी मैं कुछ दिनों के लिए भागना चाहता हूँ,इन सबसे दूर, इस भीड़, इस भागमभाग से....केवल अपने लिए, अपने विचारों के लिए...कुछ दिनों के ठहराव के लिए ......अब
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कुछ लिखने की इच्छा हो रही है, किन्तु पता नहीं क्या लिखा जाए?

कुछ लिखने की इच्छा हो रही है, किन्तु पता नहीं क्या लिखा जाए? मुझे जरा सा भी अनुमान नहीं है कि मैं क्या लिखना चाहता हूँ और मैं क्या लिखूंगा | फिर भी मैं लिखने बैठ गया | और अब प्रश्न है कि क्या लिखा जाए और कैसे लिखा जाए?लेकिन अगर गौर किया जाए इन प्रश्नों
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कुछ विचार

जब व्यक्ति किसी ओर के कहने में हो, तो उसे समझाने की भूल न करें ।जो व्यक्ति दूसरों के बहकावे में आ जाते हैं, उनमें आत्म विश्वास की कमी और निर्णय लेने की क्षमता नहीं होती ।स्वीकार-भाव विधायक है; जो होता है वह रास्ते का रोड़ा नहीं बल्कि तुमसे सर्वश्रेष्ठ
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मूल्य-परम्परा-संस्कार-प्रतिष्टा-कुल परम्परा

मैंने इंशानी जीवन के कई पहलुओ को एक ही घटना मे तोलने का प्रयास किया. करीब से एक बाप बेटे के कई उलझनों को मैने समाज परिवार ओर व्यक्ति के वैज्ञानिक तथ्यों के करीब महसूस किया. शायद जीवन का यह फलसफा हमारे समझ में आ जाए तो आपसी कलह मनमुटाव परिवारिक चिंताए दूर
 
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पढ़ना है तो पिटना होगा!!!

विदेशी वस्तुए , विदेशी कोच , विदेशी डिग्री , यह हमारी गुलाम मानसिकता का परिणाम है. विदेश में पढ़े - लिखे की इज्जत ओर घरेलू सस्थानों में पढ़े लिखे हेय नजर से देखने की प्रवर्ती का नतीजा है आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हमले .२०२० में महाशक्ति बनाने का
 
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जनार्दन के जन्मदिन का इन्तजार कब तक करेगी जनता

कल माया मैडम का 54वां जन्मदिन था। मतलब मैडम हो गई पूरे तरेपन की। तोहफे भी मिले, पर जिसका जन्मदिन था उसको नहीं, उसी की तरफ से। वो भी पूरे 74 अरब के। देखे हैं कभी 74 अरब के तोहफे। यहां देखिए- ऊर्जा कृषि सुधार योजना (2600 करोड़), गरीबों को 56180 मकान (1400
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बदलाव कहाँ आया है ?

आज निकले हैं दुनिया देखने,कहते हैं कि ये बदल गयी है |कहते हैं,लोग बदल गए हैं, जीने का ढंग बदल गया है ;शायद मैं ही नहीं बदला |सब ने कहा,अपने बंद पिंजरे से बाहर निकलो,देखो कितना कुछ बदल गया है |हर कोई तेजी से बदल रहा,तुमसे आगे निकलता जा रहा |तुम हो कि वहीँ
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आप भी शुरू हो जाइए क्यूंकि लिखना जरूरी है...

साहित्य का अपना ही आनंद है और मुझे लिखना बहुत पसंद है| मुझे परीक्षा की उत्तर पुस्तिका लिखना छोड़कर बाकि कुछ भी लिखने में आनंद आता है| लेकिन समस्या तब होती है, जब मैं लिखने बैठता हूँ और कोई विषय नहीं सूझता| तभी लिखने का सारा उत्साह उड़ जाता है और फिर जो भी
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हिन्दी ब्लोगिग मे प्रदुषण का लेवल बढा

यह कैसी खिलवाड... ? किससे खिलवाड... ? क्यो खिलवाड... ? हिन्दी ब्लोग संसार मे एन्वायरमेन्ट गडबल झाले!  कुछ दिनो से हिन्दी ब्लोग संसार मे कई तरह के विवाद देखने को मिले। किसी ब्लोगर द्वारा ब्लोगवाणी के उपर "पसंद-बटन" के बेजा उपयोग पर सवालिया निशान
 
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भूर्ण-हत्या- कैसे बना दानव - मानव ?

प्लिज मम्मा, मुझे मत मारो, मुझे भी भैया के साथ खेलना है।भारत की संस्कृति विश्व की सर्वोच संस्कृति है. संस्कृति हमारी धरोहर है, विरासत है, अंहिसा की प्रतिध्वनी में फलने वाली इस देश की धरती पर आज चारो तरफ हिंसा का नाद है. कहते है यह इक्कस्वी सदी महिलाओं की
 
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आज हिंदी दिवस है कोई तरह से मै दकियानूसी वाली बात नहीं करुगा-मुंबई टाइगर

आज हिंदी दिवस है कोई तरह से मै दकियानूसी वाली बात नहीं करुगा आज के हिंदी बर्थ डे कों बड़ी ही प्रसंता से मना रहा हू . आज मै ने यह निश्चय किया की कोई भी हाल में हिंदी भाषा कों बढावा मिले, सहजता से लोग अपनाए , अपनी प्रिय भाषा बनाए, इस और मेरे जंगल राज
 
HEY PRABHU YEH TERA PATH