शीशा और लोहा ------ चार मुक्तक ----- यशवन्त मेहता "यश"
मुक्तक १शीशे के सपने मत सजाओपल भर में चूर हो जायेंगेलोहे के सपने सजाओतूफानों में भी टूट न पाएंगेमुक्तक २मुकाम हासिल उन्हें ही होते हैंलोहे के सपने जो सजोते हैंवो अपनी किस्मत पर रोते हैंशीशे के सपने जो सजोते हैंमुक्तक ३शीशे के घर में नहीं
May 14 2010 07:50 AM



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