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जहां लिखना सीखा

मैं जैसा भी हूं, ऐसा क्यों हूं ? जब मैंने ये सवाल ख़ुद से पूछा, तो मैं मेरे अतीत में चला गया। अतीत के पन्नों पर पड़ी धूल को हाथों से साफ किया.... तो फिर कई पन्ने साफ-साफ चमकने लगे। इनमें से कुछ पन्ने बड़े चमकदार हैं। अतीत के एक पन्ने पर चमकीले अक्षरो
 
जितेंद्र भट्ट