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फेंको ये किताबें...

हाँ  हाँ  यादों  में  है  अब  भी, क्या  सुरीला  वो  जहाँ  था, हमारे  हाथों  में  रंगीन  गुब्बारे  थे, और  दिल  में  महकता  समां  था, यारा  हो 
 
Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय)