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पांडेजी ! मै ठीक ठाक व्यख्यान कर रहा हु ना रेलवे का !!!

 रेल हमारे देश का दर्पण है. जिस तरह में रेल में बैठने की जगह नही मिलती है, ठीक उसी तर्ज पर हिन्दुस्थान की सरजमी पर रहने को घर नही मिलता है. शायद हम रेलों की इस भीड़ में शामिल होकर अपने अस्तित्व को ही खो दिया है. रेल गाडी  में हर आदमी एक
 
MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर