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मैं और मिसेज खन्ना

मैं और मिसेज खन्नाअक्सर चाय पीते हैरोजाना शाम कोउस वक़्त भूल जाते हैहर किसी काम कोमौसम बदला वक़्त गुजरापर नहीं बदला हमारा चलनयुही चुसकिया लेते रहे हमएक दिन सहसामेरा बेटा पास आयाचाय के वक़्त हीउसने हमें डरायावह बोला डेडीकल चाय के वक़्तमेरी शादी है आ
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ग़ज़ल

दीदारे यार होने का जरा जश्न तो मनाने दो, यार मेरा फ़िर कहीं पर्दा नशीं न हो जाये। बड़ी मुद्दत से हमको तो खुदा से ये शिकायत थी, ये ख्वाब उनकी बेरुखी से फ़िर न खाक हो जाये। पर खुदा ने भी इनायत की मेहरबां हुआ हम पर, मोहलत इतनी दे ही दी तमन्ना अधूरी न रह जा
 
JHAROKHA
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हाय मेरी किस्मत

स्वर्ग और नरक के बीच में लटक गया क्या करू अब मै जमी पर अटक गया निकला था मैं स्वर्ग जाने को मगर जाने कैसे रास्ता मैं भटक गया किए थे कई पुण्य पिछले जन्म मे मैंने उनके फल से स्वर्ग का टिकट कट गया जाने कौनसा पाप बीच मे आ गया रस्ते मे ही मेरा भेजा सटक गया