दर्द जो आखिर बह निकला!
आज सुबह जब ऑफिस आई तो एक मेल थी मेरे एकाउंट में और उसमें थी एक कविता - पढ़ा सोचा और आँखें भर आयीं फिर डूबने लगी अतीत में और उतराने लगी वर्तमान में
May 18 2010 02:08 PM



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