इस प्यार ने क्या कुछ बदला है...
सच!आज पहली बार सुबह सूरज निकला तो कितना भला लगा सूरज की सुनहरी किरनों ने चूम लिया बदन मेरा तुम थे कोसों दूर पर यूं लगाजैसे यह प्यार भरा पैगाम तुमने ही भेजा है इस प्यार ने क्या कुछ बदला है कि अब तो हर शय निखरी-निखरी लगती है... -फ़िरदौस ख़ान
Apr 27 2010 06:12 AM



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