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संगठन एक नही बनता, दो बनते हैं

"ब्लागर संगठन" यह इन्ट्रनैशनल ब्लागर मीट, दिल्ली का मुख्य टापिक था। मैं संगठन का सदस्य नहीं बनना चाहता हूं। लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि मैं संगठन का विरोधी हूं। मैं ना किसी विचार का पक्ष लेना चाहता हूं और ना विपक्ष में हूं। आमतौर पर किसी
 
अन्तर सोहिल
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एक टिप्पणी के जवाब में

जबरदस्ती, बाध्य करने से या दमन द्वारा कोई कार्य करवाने से वह कार्य सफलता की श्रेणी में नही आ सकता। जो कार्य स्वस्फूर्त होता है, उसी में आनन्द है। जो दबाया जायेगा, वह तो सापेक्ष विरोध से प्रकट होगा ही। अगर संस्कृति बचाने के नाम पर कोई आपको धोती-कुर्ता
 
अन्तर सोहिल