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बकवास

मुझे राम से काम नहीं, रावण से काम चल जायेगा।सिक्का खोटा ही सही, अंधे बाज़ार में चल जायेगा। दुनिया को लाख समझाओ, समझेगी नहीं, भरे बाज़ार में रोता ही रह जायेगा। जानते हो कि दुनिया चार दिन की है, पर सामान सौ बरस का जोड़ते हो, बिजली से श्मशान में जलोगे, पर
 
kandpals
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टिप्पणियां

मैंने तो चाँद सितारों की तमन्ना की थी मुझे ऐसी बीवी मिली जिसके चाँद से चहरे पर चेचक के दाग थे।मै तो चला जिधर मिले रास्तापीने के बाद मेरे साथ अक्सर ऐसा हो जाता है।पहला पहला प्यार है, पहली पहली बार हैहर खूबसूरत लड़की से यही कहा जाता है। यादे न जाए बीते
 
kandpals
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आदमी

एक आदमी ऊँचाई से गिरा और मर गया । इससे पहले वही आदमी 'खुद' से गिरा थापर बेशर्मी से हँसता रहा था। अरे भैया,ऊँचाई का फर्क आदमी ही जानता है।
 
kandpals
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क्यूंकि

मेरे पास एक घर है, एक छत है, फिर भी मैं दुखी हूँ,क्यूंकि मेरे पड़ोसी की छत चूती नहीं। मेरे पास दो जोड़ कपडे हैं,फिर भी मैं दुखी हूँ,कि मेरे पडोसी के कपडे मुझसे चमकदार कैसे। मैं और मेरा परिवार दो वक़्त की रोटी खा लेता है,फिर भी मैं दुखी हूँ,कि सामने की
 
kandpals
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दोस्त और दुश्मन

मुझे शिक़वा है उन दोस्तों से जो पीछे से वार करते हैं, उनसे अच्छे वह दुश्मन जो सामने नज़र आते हैं।
 
kandpals
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जीना और मरना

मैं जिया कुछ इस तरह कि मरने वाला शर्मसार था। मैं मरा कुछ इस तरह कि जीने वाला जार जार था। जीने और मरने में फर्क इतना है यारों, कोई जीने के लिए जीता है, तो कोई मर कर भी जीता है।
 
kandpals
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इत्मीनान

मैं दिन भर सोचता रहा- क्या करुँ, क्या न करुँ।यह करुँ, यह न करुँ। इसी उधेड़बुन में पूरा दिन बीत गया।रात आयी और मैं चादर तान कर सो गया।
 
kandpals
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हल्का-पन

भारी-भारी चीज़ें फेंको, आज जमाना हल्के का,नए दौर की नई हवा है, चला जमाना हल्के का,भारी-भारी चीजें फेंको, आज जमाना हल्के का।हल्की गाड़ी, हल्की साड़ी, हल्के सब सामान भए,कंप्यूटर, मोबाइल हल्के, हल्के घर के काम भए,बीवी हल्की, टीवी हल्का, वजन भी हल्का पल्के
 
Sachin Rathore
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काम

वो काम भी क्या काम है, जो थोड़ा भी आराम न दे। खुशियाँ भले ही दे न दे, थोड़ा सा अहतराम तो दे। न समय किसी से मिलने का , दो घड़ी किसी की सुनने का। मेरी राह तकने वालों को, कोई मेरा पैगाम तो दे। वो जीवन भी क्या जीवन है, जो भाव शून्य हो चला सुनो। हर तरफ़ झूठ
 
APNA SAMAJ
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शिद्दत......

लिखा नसीब का आज मेरीनज़रों के सामने है आयावो दिल भी तड़पा याद मेंथा जिसने मुझे भुलायाजब मेरा दिल राह भूलाजिंदगी भी ख़ुद से बिछड़ीमैंने मंजिल की राह पायीजब वो रहनुमा बन के आयाआज गहराइयों से दिल कीतुमको आवाज मैंने दी हैदीद की आरजू ने तुमकोमहफिल में आज
 
Shikha Deepak
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"गुम" ..........."राह"

चलते चलते थक गईराह भी गुम हुईमगर मुझे मंजिल कीछाया भी दिखाई न भी पड़ीहर खुशी मेरी लुट गईफ़िर भी न पलकें नम हुईंजो ख़ुद की आँखों में कैद हैमैं आंसुओं की वो झड़ीजिंदगी में अब कोईअरमान बाकी न रहा जिसके मोती बिखर गएमैं ऐसी सपनों की लड़ी तन्हा चली थी तन्हा
 
Shikha Deepak
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ख़ुद ही

बसा के उनको मन में अपनेनज़रों को उनसे फेर लियाअपने ही हाथों ख़ुद हमनेअपना हर सपना तोड़ दियाबन कर मेरे मन के मालिकरहते थे कल तक जो दिल मेंआज हम ही ने ख़ुद अपनेमसीहा का घर तोड़ दियाअपनों से क्या शिकवा करेंगैरों को इल्जाम क्या देंबढ़ा रहे थे जो उन तकख़ुद उन
 
Shikha Deepak
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यथार्थ

मेरी आँखों की कोरों पर दो मोती से जब चमके मैंने जाना यह मेरी पीड़ा थी दुनिया ने समझा यह अभिनय था शायद मैं ग़लत थी हाँ! मैं ही ग़लत थी यह अभिनय ही तो था एक उत्कृष्ट अभिनय आँखों में झिलमिलाहट थी और होठों पर मुस्कान हृदय में छटपटाहट थी और चेहरे पर शांत भ
 
Shikha Deepak