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अंतिम इच्छा

मैं चाहती हूँमरने के बाद मुझे दफ़ना दिया जाएमेरी कब्र बहुत गहरी होमैं उस जगह रहूँजो धरती अपनी बेटियों के लिए बचाकर रखती हैवहाँ जरूर बहुत ठंडक होगीमैं कल्पना करती हूँमेरी कब्र की पोली मिट्टी में बरगद जैसा कोई पेड़ उगेउसकी जडें मेरी छाती से होती हुई पाताल
 
शशिभूषण
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सपने की याद

यह कविता मैंने अपनी उदासी,अकेलेपन और बेचैनी में कई कई बार लिखी.अनेक साथियों से शेयर किया.फिर भी इसे सार्वजनिक करने की मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी.डर था कहीं गलत न समझ लिया जाऊँ.इससे पहले मुझे कविता लिखकर खुशी मिलती रही है.सर्जना का सुख.पहली बार यह कविता
 
शशिभूषण
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प्यार तुम्हारा रंगों का त्यौहार

एक रंग आसमान काअनेक रंग धरती केघुलते है भीतरआती है जब तुम्हारी यादएक रंग मिलन काअनेक रंग सपनों केपड़ते हैं ऊपरहोता है जब तुम्हारा साथएक रंग आँख काअनेक रंग आत्मा केरंगते हैं प्राणदेखता हूँ जब तुम्हारा रूपएक रंग कविता काअनेक रंग करुणा केरचते हैं होठकहता
 
शशिभूषण
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क्रांति के सिपाही की जेब में प्रेम कविता

मेरे सब की धुरी हो तुममैं दूसरों की शिक़ायतें तुम्हीं से करना चाहता हूँदूसरों से मिले आशीर्वाद भी तुम्हें ही दे देना चाहता हूँतुम मुझे सबसे सुंदर इसलिए भी लगती होक्योंकि मेरे भीतर की सारी सुंदरता तुम्हारे लिए हैतुम्हें चूमने तुम्हारे गले लगने की मेरी
 
शशिभूषण
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इसे डायरी की तरह नहीं लिखा जा सका

सुबह जल्दी जाग गया थादिन भर किसी से बहस नहीं हुईपिता ने गालियाँ नहीं दीसहानुभूति नहीं दिखाई किसी नेन ही दोस्तों ने कोई काम करायाअपने ही छोटे-मोटे काम निपटा पायामसलनकपड़े धोनादाढ़ी बनानासाइकिल का टेढ़ा हैंडल सुधरवानादवाइयों की उधारी चुकानासिरदर्द कम
 
शशिभूषण
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दोस्ती

किताब सी तुम्हारी दोस्ती.पढ़कर इम्तहान देनान लिखकर ईनाम लेनाबस आदमी होते जानाज़मी-आसमां से भर जाना.ज़िल्द बदलने की चिंता न पन्ने उखड़ने का डरबस बरतना प्यार सेसंवरते जाना.काली स्याही मेंउजली भाषा सीसाथी किताब सीतुम्हारी दोस्ती.
 
शशिभूषण