दिल की दूआ
लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरीज़िन्दगी शम्मा की सूरत हो ख़ुदाया मेरीहो मेरे दम से यूं ही मेरे वतन की ज़ीनतजिस तरह फूल से होती है चमन की ज़ीनतज़िन्दगी हो मेरी परवाने की सूरत या रबइल्म की शम्मा से हो मुझको मुहब्बत या रबहो मेरा काम ग़रीबों की हिमायत
Nov 20 2009 03:39 PM



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