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हम हैं तो आखिर वही सड़ी मिडिल क्लास मेंटेलिटी वाले ....

"तुम लोगों को देखते हो -- वे दुखी हैं क्योंकि उन्होंने हर मामले में समझौता किया है, और वे खुद को माफ नहीं कर सकते कि उन्होंने समझौता किया है। वे जानते हैं कि वे साहस कर सकते थे लेकिन वे कायर सिद्ध हुए। अपनी नजरों में ही वे गिर गए, उनका आत्म सम्मान खो
 
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
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जमीनी स्तर क्या कोई नया परिवर्तन का वाहक बन सकता है "ब्लॉग" ?

नीचे टंगा लिंक श्यामपट में चिपका है   अपनी पहली ब्लॉग पोस्ट  का ! जिसे देखकर अपने स्व-प्रेरित मानसिक-ब्लॉग-व्रत को तोड़ने का मन बना |जरूरत एक नए ब्लॉग की ......?आवश्यकता आविष्कार की जननी है | बगैर ज़रूरत के किसी चीज़ का जन्म नहीं हो सकता है |
 
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
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क्या आप इंटेलिजेंट समझते हैं अपने ...तो डरते क्यों हैं मूर्ख बनने से ? ज़रा हिम्मत तो दिखाइए !

ऐसा माना जा सकता है कि पूरे साल भर सच बोल-बोलकर ऊब जाने के बाद ही ऐसे किसी  मूर्ख  (फूल )दिवस के बारे में किसी ने शायद सोचा होगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या आज  भी ऐसे किसी दिवस की दरकार है, जबकि लोग साल भर दूसरे को टोपी पहनाने  के
 
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI