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सलीपले, सलीपले, डोगणी

1. एक बेर जाट विदेश तै आया, अर आके बोल्या –“मैं एक रिसर्च करके आया सूं।” सारे डाक्टर कट्ठे कर लिये अर कहण लाग्या के आ ज्याओ, थमनै दिखाऊं। फेर एक काकरोच की टांग तोड के मेज पै छोड दिया अर उस तै बोल्या –“चल भाई चल।”काकरोच चल पडा।फेर दूसरी टांग तोड दी। वो
 
नीरज मुसाफिर जाट
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ताऊ से मुलाकात

14 अगस्त, जन्माष्टमी। जैसे ही ताऊ को पता चला कि मैं इंदौर में हूँ, तुरन्त ही निर्देश मिलने शुरू हो गए कि फलानी बस पकड़ और फलाने चौराहे पर उतर जा। खैर, फलाने चौराहे पर ताऊ ने किसी को भेज दिया और थोडी ही देर में मैं ताऊ के घर पर उनके सामने। देखते ही बोले
 
नीरज जाट जी