हवस के बादल
तू हवस के बादलों से घिरी है , इश्क़ वालों की नदी सूखी पडी है।गोया रावण राम से डरता है लेकिन ,आज लक्ष्मण के हवाले झोपडी है।शहर को अपने अमीरों की दुआ है , गाडियों मे लोन की तख्ती लगी है।बच्चे पागल कह के मेरा पीछा करते,ये फ़कीरी मुझको तुमसे ही मिली है।मैं
May 27 2010 06:03 PM



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