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मुबारक हो।

सूखी घास के ढेर को शरारा मुबारक हो, अंधो को रोशनी का नजा़रा मुबारक हो। किसने उँडेल दी है कालिख आसमाँ पर, गर्दिश मे डुबता वो सितारा मुबारक हो। पाँव निकल पडे तो रास्ते अपाहिज हो गये, लो बैसाखियो का सहारा मुबारक हो। फूलो के सर क़लम कर दिये पत्तो की धार
 
डॉ.श्रीकृष्ण राऊत