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मुझे कदम-कदम पर

मुझे कदम-कदम पर चौराहे मिलते हैंबाँहे फैलाए !!एक पैर रखता हूँ कि सौ राहें फूटतींव मैं उन सब पर से गुजरना चाहता हूँबहुत अच्छे लगते हैं उनके तजुर्बे और अपने सपनेसब सच्चे लगते हैंअजीब सी अकुलाहट दिल में उभरती हैमैं कुछ गहरे मे उतरना चाहता हूँजाने क्या मिल
 
Rangnath Singh