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एक शहादत और...!

       अज़मत अली बंगश भी सच का पुजारी था. उसने सच को सामने लाने का जनून नहीं छोड़ा पर अपनी जान कुर्बान कर दी. यह 48 घंटों के अंदर अंदर ही Samaa टीवी के लिए दूसरा बड़ा झटका था. अभी तो
 
Rector Kathuria
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बस अब यादें रह गयीं पूनम सपरा की

     उन दिनों दैनिक जागरण ने अभी पंजाब में कदम रखा ही था. पंजाब के जानेमाने पत्रकारों वाले इस स्टाफ में हंमारे साथ पूनम सपरा भी थी. पूरी तरह गहर गंभीर और एक दम तेज़ तरार. उस ने मेडिकल बीट संभाली तो सब के छक्के छुड़ा
 
Rector Kathuria
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खुद को पत्रकार कहने वाले ही दे रहे हैं प्रेस कौंसिल को चुनौती

भारतीय प्रेस परिषद जिसे अधिकतर लोग  प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया के नाम से जानते हैं का सम्मान देश में भी है और विदेश में भी. यह माननीय संस्थान किसी भी अखबार, पत्र-पत्रिका या टीवी चैनेल के पत्रकारों, प्रबंधकों यहां तक की मालिकों से भी पूछ सकता
 
Rector Kathuria
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बिकनी पर राजनीति की रोटी क्यों सेकते हो नेता जी ?

समाज में संस्कृति को लेकर कसीदे हमेशा ही पढ़े जाते हैं । भारतीय होने के नाते हम भी इस पर खुली बहस कर सकते हैं (बिना राजनीति के ) । समाज की दृष्टि में सभी नागरिक समान हैं और इसलिए किसी एक ( सत्ताधारी ) को यह अधिकार नहीं कि वह अपना निर्णय सभी पर थोपे ।
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" महिलाएं ही महिलाओं की सबसे बड़ी दुश्मन हैं "..........मीडिया चर्चा

भारतीय समाज की परिकल्पना स्त्री के बिना संभव ही नहीं लगती परन्तु ऐसे में हमारा समाज पितृसत्तामक ही रहा है या कह लीजिये कि स्त्री को जो अधिकार , स्थान और सम्मान मिलना चाहिए था वह आज भी उससे वंचित रही है तो गलत न होगा । समाजिक ढ़ाचे को संतुलित करने के
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वन्दे मां को कैसे भूल सकता है तू ????????

जी हाँ बिल्कुल सही सुना आपने। अगर ऐसा वाकया आपको देखने को मिले जहाँ कोई अपनी माँ को माँ कहने में शर्म महसुस करता हो और पुछने पर कहता हो ये बताने के लिए कि ये माँ है,माँ कहना जरुरी नहीं है। जरा सोचिए कितनी शर्मसार करने वाली घटना है। मेरा ये कहना उनके
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गाय काटने वालो का क्यों ना सर कलम कर दिया जाये?????

गाय " जिसे हमारे धर्म (हिन्दू) में माता का दर्जा प्राप्त है। अब माता क्यों कहा जाता है ये सबको पता है। भारत कि गौरवशाली परंपरा में गाय का स्थान सबसे ऊँचा और अत्यन्त महत्वपूर्ण रहा है। गाय माता की महिमा पर महाभारत में एक कथा आती है। यह कथा रघुकुल के र
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"पुरुष तो पुरुष................ महिलायें भी कम नही"

सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर रोक का कानून बने या आदेश जारी हुए भी काफी अरसा हो गया है, परंतु स्थिति बदतर होती जा रही है। विश्वभर में सिगरेट पीने वालों में से १२ फीसदी भारतीय हैं। ये आँकड़े चौंकाने वाले हैं कि धूम्रपान करने के संदर्भ में अगर वैश्व
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"भगवान मनु स्त्री विरोधी थे, ये कहना कितना जायज"

हमारे समाज में कुछ प्रगतिशील महिलाओं का मानना है कि भगवान मनु स्त्री विरोधी थे। क्या जो मनु मनु-स्मृति हम पढ़ते और देखते है वह प्रमाणिक है ,, और अगर है तो कितने प्रतिशत ,, क्या ये वही मनु-स्मृति है जो भगवान् मनु ने लिखी थी और पूर्ण शुद्ध रूप में हमार
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आज हर मुसलमान आतंकवादी है क्या ?

हर आंखों में शक था.............हर मुंह पर सवाल था नाम का ......जाति , धर्म का । शक के दायरे में हर इंसान आने लगा । हर दाढ़ी में मुसलमान दिखने लगा ...............पर क्या किसी अपराध के पीछे धर्म और मजहब ही होता है क्या ? किराये पर मकान देते हुए मकान मा
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टूटते रिश्ते अब तलाक तक - स्त्री विमर्श , कितन सही ? कितना गलत ?

भारत में वैवाहिक जीवन अन्य देशों की तुलना में बहुत मजबूत है , प्रेम ही पति पत्नी को एक दूसरे से जीवन के अंतिम समय तक का साथ निभाता है, हमारे यहां की परम्पराये विश्व के अन्य देशों की तुलना में बहुत ही मजबूत हैं। पर समय के साथ ही साथ वैवाहिक जीवन में क
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सच जो मैंने देखा..........लड़कियां ऐसी बनती है शिकार

मैं प्रतिदिन बस से नोएडा अपने पत्रकारिता विश्वविद्यालय जाता हूँ रोज वही भाग-दौड़। सुबह उठना और फिर जल्दी-२ नहा धोकर बस पकड़कर नोएडा के लिए रवाना होना यही मेरी दैनिक प्रक्रिया है पर यह बताने के पीछे जो बात है वो यह है कि-मै 3 सितम्बर को नोएडा से वापस
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दो औरत के झगड़े का मजा ......पूरे मोहल्ले वाले लें । आप भी लीजिए

यूँ तो महिलाओं के झगड़े हमने बचपन में बहुत देखे हैं । बिना बात के ही अगर लड़ने का मूड हो तो महा संग्राम शुरू हो जाता है । किसी से कुछ न कहा हो पर झगड़े के समय सारा प्यार उमड़ आता है । जैसे कितनी अच्छी हो ? फलां तुम्हारे बारे में ये ये ? सभी तुम्हारी
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मीडिया को न्यूज दिखाना चाहिए या फिर व्यूज

मीडिया का कार्य क्षेत्र क्या है? मीडिया को न्यूज देना चाहिए या फिर व्यूज ( विचार ) ? इस पर हमेशा से ही सवाल उठता रहा है । वैसे मीडिया का प्रमुख कार्य तो न्यूज ही है परन्तु न्यूज का प्रभाव क्या क्या हो सकता है यह मीडिया बिल्कुल भी नहीं सोचती है । आज ब
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दूध के धुले वो भी नहीं , तो फिर क्यों उछालते है कीचड । मीडिया रेग्युलेटरी पर आपकी क्या है राय?

मीडिया रेग्युलेटरी को लेकर पत्रकारों ने जंतर मंतर पर मार्च करके इसके खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया । भारत में वैसे तो मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है । पर इस स्तम्भ को कमजोर करने के लिए सरकार के द्वारा जो प्रयास किये जा रहे हैं वो निंदनीय
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यौन शोषण के शिकार होते हमारे बच्चे। दागदार होती गुरू शिष्य पंरपरा ,बचाव कैसे ?

शिक्षा के मन्दिर में हो रहा है यौन शोषण और हमारे बच्चे हो रहे हैं इसका शिकार तो अपनी आवाज बुलंद कर इस तरह की घटनाओं को दीजिए मुँहतोड़ जवाब।न्यूज पेपर और टी वी में आये दिन हम बाल यौन शोषण की खबरें देखते और सुनते हैं। बच्चों के साथ यौन शोषण की घटनाएं ब
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बच्चे भविष्य भारत के, गुडिया , रामू और श्याम के हाथ में कलम नहीं है कूड़े की बोरी

जिन हाथों में कलम होना चाहिए उन हाथों में कूड़े की बोरी देख कर मन बहुत ही दुखी होता है। इन नन्हें मुन्हें बच्चों की सुबह होती है कूड़े के ढेर पर । पिछली सर्दी में मुझे किसी काम से जल्दी उठकर कहीं बाहर जाना हुआ। घना कोहरा और कटीली हवाओं के चलते मैंने