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हमें नहीं चाहिए सम्मान, क्या कल्लोगे?

हाँ सुना था हमने भी. चिल्ला रहे थे मीडिया वाले - “सुनो सुनो सुनो! दो सिंह को सरकारी तमगे के लिए बुलाया गया”. किसी ने हमारे मन की बात सुनी? आपकी मर्जी हुई और आप हमारे पैसे कमाने वाले रोजी रोटी पर फ़िदा हो गए. कर दिया घोषणा कि “भई आओ ए
 
कौतुक