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माहिये - 3

31. देखी है इबादत जब देखना है हमको उसका तो करिश्मा अब .32. मिलती है खुशी ऐसे मिलकर अपनों से मिसरी हो घुली जैसे .33. दिलबर हैं मेरे आते जा के ले आऊँ मैं धुन गीत मधुर गाते .34. विस्मित कर दूँ उनको हो के खुशी पागल लिपटा लेंगे वह मुझको .35. चाहो जो मिलें