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प्रेम अबीर उछाल;होली लाई रंग गुलाल

आप सभी को होली की राम-रामलोक पर्वों का मज़ा ग्रामीण अंचलों में कुछ अलग ही रंगत के साथ मौजूद है.जैसी होली मैंने अपने मालवा के गाँवों में देखी है;खेली है वैसी बात अब शहरों में नज़र नहीं आती. मेरी बोली मालवी में राजस्थानी और गुजराती भाषा का वैभव बड़ी मधुरता के
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आज कुमार गंधर्व की 18वीं बरसी है !

इन्दौर के प्रमुख दैनिक नईदुनिया में आज कुमार जी को उनकी 18वीं बरसी पर याद किया है जिसे क़लमबध्द किया है जीवनसिंह ठाकुर ने. लिखने पढ़ने वालों की बिरादरी में जीवनसिंह जी का नाम अपरिचित नहीं है. वे कुमारजी की कर्मस्थली देवास में ही रहते हैं और कुमारजी के
 
sanjay patel
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पं.कुमार गंधर्व - मंगल दिन आज ; बना घर आयो

मालवा के लोक संगीत में शास्त्रीय रागों की असीम संभावना तलाशने वाले कुमारजी ने एक तरह से मालवा को वैश्विक पहचान दी . प्रस्तुत रचना राग मालावति में निबध्द है जिसमें कुमारजी ने मालवी बंदिश को पिरो दिया है. कलाकार हमेशा अपने कलाकर्म से संगीतप्रेमियों के
 
संजय पटेल...
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