पसंद करें
2
नापसंद करें

एक पुराने दोस्त के जन्मदिन पर

(आज सुबह-सुबह आदतन अपने प्रिय ब्लाग कबाड़खाना पर अन्य ब्लागों की नयी पोस्टें देखने गया तो भाई रंगनाथ के ब्लाग पर मार्क्स खींच कर ले गये। आज उनका जन्मदिन है। रंगनाथ ने सुझाया था कि उन सबको जिनकी ज़िन्दगियों पर मार्क्स का असर है, अपने विचार और उन संबधों के
 
अशोक कुमार पाण्डेय
पसंद करें
4
नापसंद करें

`व्यावहारिक` लोग न पढ़ें

मुझे उन तथाकथित व्यावहारिक लोगों की बुद्धि पर हंसी आती है, अगर कोई बैल बनना चाहे तभी वह मानवता की पीड़ाओं से मुंह मोड़कर अपनी ख़ुद की चमड़ी की रखवाली कर सकता है.' - मार्क्स
 
Ek ziddi dhun
पसंद करें
5
नापसंद करें

`व्यावहारिक` लोग न पढ़ें

मुझे उन तथाकथित व्यावहारिक लोगों की बुद्धि पर हंसी आती है, अगर कोई बैल बनना चाहे तभी वह मानवता की पीड़ाओं से मुंह मोड़कर अपनी ख़ुद की चमड़ी की रखवाली कर सकता है.' - मार्क्स
 
Ek ziddi dhun
पसंद करें
1
नापसंद करें

पण्यों की जड़-पूजा और उसका रहस्य

अर्थशास्त्रियों का तर्क-वितर्क अजीब ढंग का होता है. उनके लिए केवल दो प्रकार की ही संस्थाएं हैं : बनावटी संस्थाएं और प्राकृतिक संस्थाएं. सामंती संस्थाएं बनावटी संस्थाएं हैं, बुर्जुआ सस्थाएं प्राकृतिक संस्थाएं हैं. इस बात में वे धर्मशास्त्रियों से मिलत
 
संदीप
पसंद करें
1
नापसंद करें

मूल्य की अभिव्यंजना के दो ध्रुव : सापेक्ष रूप और समतुल्य-रूप

मूल्य के रूप का सार रहस्य इस प्राथमिक रूप में छिपा हुआ है. इसलिए इस रूप का विश्लेषण करना ही हमारी असली कठनाई है. यहाँ दो भिन्न प्रकार के पण्य (हमारी उदाहरण में कपड़ा और कोट), स्पष्ट ही, दो अलग-अलग भूमिकाएँ अदा करते हैं. कपड़ा अपना मूल्य कोट में व्यक्त
 
saathisukhdev
पसंद करें
0
नापसंद करें

पण्य के दो कारक : उपयोग मूल्य और मूल्य (मूल्य का सार और मूल्य का परिमाण)

जिन समाजों में उत्पादन की पूंजीवादी प्रणाली व्याप्त है, उनमें धन” पण्यों के विशाल संचय’ १ के रूप में सामने आता है और उसकी इकाई होती है एक पण्य. इसलिए हमारी खोज अवश्य ही पण्य के विश्लेषण से आरंभ होनी चाहिए. पण्य या जिंस के बारे में सबसे पहली बात यह है
 
drvarma68