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श्याम सवैया--छह पंक्तियों वा ला सवैया ----जन्म मिले यदि...

जन्म मिले यदि...(श्याम सवैया छंद ) (१)जन्म मिले यदि मानव का, तौ भारत भूमि वही अनुरागी।पुत्र बड़े नेता का बनूँ , निज खातिर देश की चिंता हो त्यागी।पाहन ऊंचे मौल सजूँ, नित माया के दर्शन पाऊँ सुभागी।जो पशु हों तौ श्वान वही, मिले कोठी ओ कार रहूँ बडभागी ।काठ
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मेरी कौन सुनता है

 मरने से पहले एक रपट मे:नाम :- जो पसंद होउम्र :- नब्बे साल मानवीय गड़ना के अनुसारकार्य :- जीवन को पालना-पोसनाअनुभव :- लगभग जीवन भरशिकायत का संपूर्ण विवरण (अपनी जुवानी ) :- साहब वैसे तो मैं आपसे कहीं ज्यादा बुजुर्ग हूँ ,मगर चूँकि आप सरकारी अफसर है ,
 
रूपम
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मस्तिष्क और मन का अंतर

सामान्यतः शब्द मस्तिष्क और मन एक दूसरे के पर्याय के रूप में उपयुक्त कर लिए जाते हैं, किन्तु वास्तव में ये पर्याय नहीं हैं. मस्तिष्क मन का एक अंग होता है ठीक उसी प्रकार हैसे मन शरीर का एक अंग होता है अथवा व्यक्ति समाज का एक अंग होता है.मनुष्य की खोपड़ी के
 
देवसूफी राम कु० बंसल
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