जो छिपाए ना बने....
माटीसुनहली धूपदरख्तों के साये सेओंस की बूंदों सेकांटों के झुरमुट सेसागर के उन्मन सेदेती है छुअन माटी को.....जीवन में स्वप्न कासपने में जीवन काअस्तित्व बचाने को ।
Feb 11 2010 08:53 AM



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