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“बोरोप्लस” निकली “वोलिनी”

कल रात में दोड़ा देर से शयनकक्ष में गया. मूहँ धोया, फिर अंधेरे में ही क्रीम टटोलने लगा. मेरे हाथ में ट्यूब आई. मैनें समझा बोरोप्लस है… हथेली पर अच्छी तरह से मल कर चेहरे पर पोत ली और हाय रे… वह तो दर्दनिवारक “वोलिनी” मलम निकली.
 
पंकज बेंगाणी