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एहसास:नैतिक मूल्य जगाने वाली बाल फिल्में बनें-महेश भट्ट

कुछ समय पहले इंग्लैंड के एक पत्रकार ने मुझसे पूछा था, भारत में बच्चों की फिल्में क्यों नहीं बनतीं? जिस देश में दुनिया की सबसे ज्यादा फिल्में बनती हैं, हर प्रकार की फिल्में बनती हैं, वहां दिखाने या गर्व करने लायक बच्चों की फिल्में नहीं हैं। क्या यह शर
 
chavanni chap
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हाशमी और महेश भट्ट की नौटंकी

सदभाव बिगाड़ने की एक और 'सेकुलर' साजिश इस देश में अल्पसंख्यक होने के कई फायदे हैं. आप बहुसंख्यकों (हिन्दुओं) की कीमत पर सारी सरकारी सुख-सुविधाएं भोगकर, मीडिया और मानवाधिकार संगठनों की छत्र-छाया पाकर भी, जुल्म का शिकार होने का रोना रो सकते हैं. आपकी चाकरी
 
जीत भार्गव