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न हमारी आग का रंग बदलेगा – महेन्द्र नेह

न हमारी आग का रंग बदलेगा – महेन्द्र नेह ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ समूह हमारी चेतना पर अचानक एक हथौडे़ की तरह पड़ते हैं, और हमें बुरी तरहझिंझोड़ डालते हैं. दरअसल हथौडे़ की तरह पड़ने और बुरी तरह झिंझोड़ डालने वाली
 
रवि कुमार, रावतभाटा
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ऐ लड़की – महेन्द्र नेह – कविता पोस्टर

ऐ लड़की – महेन्द्र नेह ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ समूह हमारी चेतना पर अचानक एक हथौडे़ की तरह पड़ते हैं, और हमें बुरी तरह झिंझोड़ डालते हैं. दरअसल हथौडे़ की तरह पड़ने और बुरी तरह झिंझोड़ डालने वाली उपमाओं के पीछे होता यह
 
रवि कुमार, रावतभाटा
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शोषणकारी ताकतों से टकराता जनकवि महेन्द्र 'नेह' - रमेश प्रजापति ( 3)

आज मानव के सामने स्वप्न एवं जीवन की सच्चाई के बीच की मरूभूमि हमारे सम्मुख आकर खड़ी हो जाती है। हर तरफ अन्तर्विरोध एवं द्वन्द्व के बीच कवि बड़ी तेजी से समाज में नैतिक-मूल्यों के टूटने-बिखरने की ध्वनियाँ सुन रहा है। गहन संवेदना से लबालब इन कविताओं में
 
jagadishwar chaturvedi