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महिलांचे दुर्लक्षित साहित्य सम्मेलन

दुपारी गप्पा मारतांना सौ. सांगत होती की दर वर्षी कमित कमी ३० च्या वर निरनिराळी साहित्य सम्मेलनं होतात .मराठी मधे जितकं साहित्य लिहिलं जात नसेल त्या पेक्षा जास्त नविन हौशे गवशे साहित्यीक तयार होत असतात. सगळी साहित्य सम्मेलनं ही प्रतिथयश लेखकच हायजॅक करतात
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जुबान संभलिए मोलाना साब

मौलाना कल्बे जव्वाद का यह कहना कि खुदा ने महिलाओं को अच्छे नस्ल के बच्चे पैदा करने के लिए बनाया है, यदि वे घर छोड़कर राजनीति में आ जाएंगी तो घर कौन संभालेगा, महिला विरोधी तो है ही, इस्लाम की गलत व्याख्या करने का दुस्साहस भी है। ऐसा आए दिन होता है, जब
 
अवधेश आकोदिया
टैग: महिला
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महिला आरक्षण-क्रांतिकारी कदम !

यू पी ए सरकार पर जब इस सत्र में मंहगाई को लेकर चौतरफ़ा हमले होने वाले थे ,परिदृश्य एकदम से बदल गया है। सरकार के प्रबंधन में फिर से सोनिया गाँधी का हस्तक्षेप हुआ और एक बहु-प्रतीक्षित माँग को एक दिशा मिल गई। महिला-आरक्षण की माँग नई नहीं है । इसे पेश किये
 
संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI
टैग: महिला
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जनाना राज चला गया है या आ रहा है?

वे पढ़ीलिखी है. न भी है तो भी अर्थार्जन करती है. कार्यालय जाती है, शाम को घर लौटती है मगर उसे पुरूषों वाली सुविधा नहीं मिलती. अगर पुरूष सिगरेट पी सकता है तो आप भी पी सकती है. सिगरेट पियें, दारू पियें, चरस लें. मगर आजादी के नाम पर नहीं.
 
संजय बेंगाणी
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पुरुषों पर अत्याचार

महिला अधिकारों की जब बात उठती है तो महिलाएं क्या मांगती हैं? जाहिर है बराबरी का अधिकार। लेकिन अगर बराबरी की मांग करते-करते कोई खुद शोषणकारी की तरह बर्ताव करने लगे तो.... कम से कम कुछ मामलों में तो यही हो रहा है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि अभी भी कई जगह
 
पूनम पांडे
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शिक्षा और हिम्मत ही हैं जिंदगी के साथी

शिक्षा और हिम्मत ही मुश्किलों से सामना करने का हौसला देती हैं। अपने हक के लिए अपने ही परिवार से लड़ना मुश्किल और मजबूरी दोनों है, लेकिन यह जिंदगी की जरूरत भी है। पूर्व आईपीएस अधिकारी किरन बेदी आज बता रही हैं एक ऐसी महिला की कहानी उसी की जबानी, जो अपने
 
किरन बेदी