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अवैध टिप्पणी मे 6 Anonymous गिरफतार

कल की पोस्‍ट मे मैने अवैध टिप्पणी की बात कि थी जिसमे अश्लील और वायरस युक्‍त टिप्पणी की बात की थी, आज सुबह मै जब अपने ब्‍लाग को देखा तो 6 इसी प्रकार की टिप्‍पणी ब्‍लाग पर मौजूद थी, जो मॉडरेशन के कारण प्रकाशित नही हो पायी।मै विगत दिनो से इस प्रकार की
 
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ब्‍लाग मांडरेशन मे, कमेन्‍ट लिंक को मत खोले

मै शुरूवात से ही टिप्‍पणी के माडरेशन का विरोधी रहा हूँ किन्‍तु विगत कुछ माह से मेरे ब्‍लाग के कुछ लेखो पर जमकर टिप्‍पणी की वर्षा हो रही है। जो निहायत ही अश्लील टाईप की है, मुझे लगता है कि यह स्‍पैम जैसी प्रथा का शिकार है।कुछ दिन पूर्व ही पता चला कि
 
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"रचना" अपरम्‍पार

रचनाओ के भरमार मे,रचना अपरम्‍पार।हे देवि अब जागो,करो नारी विरोधी का संहार।ये लड़का नारी को,जींस पहनने नही देता।लिख रचनाओ के जरिये ये,रचना की ऐसी तैसी करता।।हे देवि तुम अब उतरो,जींस पहन के ही उतर।न मिले जींस तो देवि,तुम बरमूडा मे ही उतरो।।
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भारत ब्रिगेड का सपना और आकास्मिक अवकाश के लिये प्रार्थना पत्र

जबलपुर ब्रिगेड मे करीब ढेड़ दर्जन बि‍ग्रेडियरों की भ‍ार्ति हो चुकी है। मुझे सूचना मिली है कि कमान्‍डर साहब के पास काफी रिक्‍वेस्‍ट पेन्‍डिग पड़ी हुई है। कामान्‍डर महोदय से निवेदन है कि जबलपुर ब्रिगेड को भारत ब्रिगेड बनया जाये, क्‍योकि आज जबलपुर बिग्रेड
 
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भारत ब्रिगेड का सपना और आकास्मिक अवकाश के लिये प्रार्थना पत्र

जबलपुर ब्रिगेड मे करीब ढेड़ दर्जन बि‍ग्रेडियरों की भ‍ार्ति हो चुकी है। मुझे सूचना मिली है कि कमान्‍डर साहब के पास काफी रिक्‍वेस्‍ट पेन्‍डिग पड़ी हुई है। कामान्‍डर महोदय से निवेदन है कि जबलपुर ब्रिगेड को भारत ब्रिगेड बनया जाये, क्‍योकि आज जबलपुर बिग्रेड
 
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मेरा प्‍यार

तुम्‍हरी यादो के सहारे,हम यूँ ही जी रहे है।कभी तुमको देख कर,हम यूँ जी-जी कर मर रहे है।ग़र एहसास को समझो,हम प्‍यार तुम्‍ही से करते है।तुम समझो या न समझो,हम प्‍यार तुम्‍ही से करते है।।तोड़ के सारे बंधन को,रिश्‍तो को उन नातो को।प्‍यार तुम्‍हारा पाने को,
 
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मेरा प्‍यार

तुम्‍हरी यादो के सहारे,हम यूँ ही जी रहे है।कभी तुमको देख कर,हम यूँ जी-जी कर मर रहे है।ग़र एहसास को समझो,हम प्‍यार तुम्‍ही से करते है।तुम समझो या न समझो,हम प्‍यार तुम्‍ही से करते है।।तोड़ के सारे बंधन को,रिश्‍तो को उन नातो को।प्‍यार तुम्‍हारा पाने को,हद
 
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दिवेदी जी के कानून के दोहरे मापदण्‍ड

हिन्‍दी चिट्ठाकारी का कोई विशेष पैमाना नही रहा है, हर पैमानेका समय के हिसाब से अपने स्‍वयं के पैमाने तय कर लेता है। श्री दिनेश राय द्विवेदी जी की दो अगल अलग टिप्‍पणी मुझे पढ़ने को मिली थी, दोनो टिप्‍पणी को एक साथ पढ़ने पर आश्‍चर्य होना स्‍वाभविक ही ह